पूजा...मेरी प्यारी बड़ी बहन 01
पहले मैं आपको अपने घर के बारे में बता दूँ | मेरे पापा का जब मैं 8 साल का था एक एक्सीडेंट में उनकी डेथ हो गई थी |
मेरे पापा एक बहुत बड़े गवर्नमेंट एम्प्लोई थे सो इसलिए हमें पेंशन के रूप में एक बहुत ही बड़ी अमाउंट हर मंथ मिलती थी | मेरे पापा के पास पहले ही काफ़ी प्रॉपर्टी थी सो हमें उस से काफ़ी रेंट आता था जिससे हमारा गुज़ारा बड़े अच्छे तरीके से होता था |
हमें किसी चीज़ की कभी कोई कमी महसूस नही होती थी | पापा की डेथ के बाद मम्मी ने ना दूसरी शादी की ना ही कभी किसी दूसरे मर्द के बारे में सोचा | उसने अपना सारा ज़ीवन हम दोनो भाई बहन की प्रवरिश के लिए ऐसे ही निकाल दिया | ऐसा नही था कि मेरी मम्मी खूबसूरत नही थी बल्कि वो बहुत ही खूबसूरत जिस्म की मालकिन थी |
जिसे कोई एक बार देख ले तो बस उसे देखता ही रहे | और मुझे यकीन था कि मेरी मम्मी को देखने के बाद ऐसा ही कोई मर्द होगा जो अपना लंड सहलाए बिना रह पाता होगा |
मेरी मम्मी लंबी ऊँची कद 5.5 फ़ीट और मेरी मम्मी का शरीर ऐसा है कि कोई देखे तो तड़प उठे | एकदम गोरी चिट्टी 38 साइज़ की बड़ी बड़ी टाइट चुचियाँ 30 कमर और 40 के गोल मटोल चूतड़ | मम्मी का शरीर भरा हुआ है लेकिन एकदम सुडोल , कहीं से कोई फैट नही,
मेरी बहन पूजा भी एकदम मम्मी पर गई है | भरा हुआ शरीर 38-40 साइज़ की चुचियाँ, गोल मटोल चूतड़ और एकदम गोरी |पूजा इतनी मस्त ओर हॉट थी कि ना जाने स्कूल के कितने ही लड़के उसके पीछे पड़े थे | घर के बाहर पूजा की मस्त जवानी की एक झलक पाने के लिए स्कूल के लड़के तो क्या मोहल्ले के अंकल भी इंतज़ार में खड़े रहते थे और जब वो पूजा की मस्त मोटी मोटी टाइट चुचियाँ और बाहर निकली हुई गांड को देख लेते तो तो उन सब से कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता |
वो सब जाकर पूजा के नाम की मुट्ठ मारते थे | मेरी बहन पूजा और मैं एक ही कॉलेज में पड़ते थे, पूजा फाइनल ईअर में थी और मैं फर्स्ट ईअर में, हम दोनो साथ ही कॉलेज जाते, हम दोनो भाई बहन कम और दोस्त ज़्यादा थे |
दोनो में बहुत हँसी मज़ाक होता था, मैं कॉलेज मैं बास्केटबॉल टीम में था और पूजा मेरा हर मैच देखने आती थी | पूजा कॉलेज जाते समय अपने शरीर को पूरा ढकती लेकिन घर में ज़्यादातर छोटी मैक्सी पहन कर रहती, मम्मी भी ज़्यादातर साड़ी और ब्लाउज़ में ही रहती थी, मम्मी और पूजा के बीच बहुत अच्छी ट्यूनिंग थी |
सब कुछ अच्छा चल रहा था, मैं ज़्यादातर समय या तो बास्केटबॉल या जिम में बीताता | घर पर मम्मी और पूजा माँ बेटी कम और दोस्त ज़्यादा बनकर रहती, तब तक मेरे मन मे उनके लिए कुछ नही था | पूजा पढने में ज़्यादा अच्छी नही थी, फिर एक दिन वो हुआ जिसने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया |
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एक बार कॉलेज में छुट्टी हुई तो मैं दीदी को देखने जब उसके क्लास रूम में गया तो रूम खाली था | मैं दरवाजे से वापिस मुड़ने लगा तो मुझे दरवाजे के पीछे से कुछ फुसफुसाहट सी होती सुनाई दी | मैं रुक गया और सुनने लगा | लड़की की दबी हुई आवाज़ “रोहित,,प्लीज़ छोड़ो मुझे अब, सब लोग जा चुके हैं..”
रोहित : बस एक किस और... बस एक... फिर चलते हैं |
लड़की : बस....बस .... अब छोड़ो भी मुझे |
रोहित : थोड़ा सा और प्लीज़...... बस एक बार ..... एक लिप् किस करने दो फिर चली जाना मेरी जान |
लड़की : ना... आआहा... अभी नही फिर कभी |
रोहित : अच्छा यह तो देखने दो पेंटी कौन से कलर की पहनी है आज |
लड़की : शटअप .... रोहित .... प्लीज़ मुझे जाने दो अभी |
रोहित : तू कुछ मत कर बस ऐसे ही खड़ी रहना ..... मैं बैठके खुद तेरी सलवार खोल के देख लेता हूँ |
लड़की : आह नो नो |
लग रहा था रोहित नीचे बैठके लड़की की सलवार खोल के अंदर झाँकने की कोशिश कर रहा था |
रोहित : यार हाथ क्यों पकड़ रही ओ मेरा ...... और अपनी टांगे क्यों बंद कर रही हो |
लड़की : प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ रोहित फिर कभी.... देख लेना |
रोहित : ठीक है ..... एक किस तो ...... |
लड़की : ओके लास्ट वन |
फिर “पुच्च” की हल्की सी आवाज़ आई और किस के बाद लड़की शायद रोहित की गिरफत से निकल के जाने लगी तो लग रहा था जैसे रोहित ने पीछे से फिर से उसे दबोच लिया हो और उसके बूब्स मसलने लगा हो |
अब जैसे लड़की उसकी बाहों में कसमसाती हुई हल्की सी फुसफुसाहट में बोली “रोहित बस भी करो प्लीज़ .... दीपू मेरा वेट कर रहा होगा .... प्लीज़ छोड़ो” अपना नाम सुनके मेरे कान खड़े हो गए |
यह पूजा दीदी की ही आवाज़ थी | मैं दरवाजे के थोड़ा और करीब हो गया | अब उनकी तेज साँसों और किस्सिंग की आवाज़ सुनाई दे रही थी जैसे एक दूसरे के जिस्म को मसल रहे हों |
मेरी दीदी किसी के साथ मज़ा ले रही थी | पता नही क्यों मुझे यह सब सुनके बहुत मज़ा आ रहा था और अपनी दीदी के बारे में ऐसा करते सोचके तो मेरा लंड अपने आप खड़ा होना शुरू हो गया |
रोहित : यार क्या कर रही हो अपनी लेग्स तो खोल |
दीदी : हाथ बाहर निकालो..... प्लीज़ बाहर निकालो हाथ मेरी पेंटी से .... मुझे कुछ हो रहा है |
शायद रोहित ने दीदी को पीछे से पकड़े हुए अपना हाथ दीदी की पेंटी में डालके दीदी की चूत पे हाथ रख दिया था | अब दीदी शायद घर जाने और मेरे बारे में भूल चुकी थी और नशीली आवाज़ में उसके कराहने की आवाज़ आ रही थी जैसे “आह .... उम्म्म.... रोहित मेरी जान ..... मेरी जान निकल रही है” शायद दोनों आउट ऑफ कंट्रोल होते जा रहे थे और उनके अंदर का गरम पानी उबाल मारने लगा था |
रोहित दीदी को गरम करने का अपना काम करता रहा और उसके बोलने की कोई आवाज़ नही आई |
फिर कुछ देर बाद जैसे मदहोशी की आवाज़ में दीदी बोली “मत करो ना ......... प्लज़्ज़्ज़ ...... मैं पागल हो रही हूँ”
फिर “पुच्च पुच्च” की हल्की हल्की सी आवाज़ आने लगी | लग रहा था दीदी और रोहित पूरा मज़ा ले रहे हैं लेकिन वो तो मज़ा ले रहे थे मगर मुझे पहली बार पता नही क्यों यह सब सुनके अजीब सी फीलिंग हो रही थी |
मेरा लंड पेंट में से उबरा हुआ नज़र आ रहा था और बहुत अच्छा लग रहा था | मैं उनकी मस्ती भरी आवाज़ें सुनके ही मस्त हुआ जा रहा था तभी दीदी बोली “रोहित ...... अब इसे क्यों नीचे कर रहे हो” |
रोहित : पेंटी उतारने दो ना प्लीज़ |
दीदी : पागल हो गए हो क्या.... मैं ऐसा कुछ नही करूँगी ... वो भी यहाँ |
रोहित : नही पूजा मैं ऐसा वैसा कुछ नही करूँगा लेकिन मुझे बस अपनी पेंटी तो उतार के दे दो आज |
दीदी : ना... नही नही... मैं घर कैसे जाऊंगी |
रोहित : सलवार के नीचे से क्या पता चलेगा यार |
रोहित : यार वो तो कल लाकर दोगी आज रात मैं क्या करूँगा प्लीज दे दो आज तुम्हारी इस पेंटी पर अपना निकालूँगा प्लीज जान |
मैं भी उनके मज़े के साथ पूरा मज़ा ले रहा था | तभी पीछे से मेरा दोस्त मोहित आ गया और बोला “दीपक तू यहाँ क्यों खड़ा है यार ... घर नही जाना”
मैंने कहा “यार दीदी को ढूंड रहा हूँ” |
वो बोला “दीदी गेट पे तुमको ढूंड रही होगी ... चल गेट पे देखते हैं”
‘साले ने सारा मज़ा खराब कर दिया’ यह सोचता मैं उसके साथ गेट की तरफ चला गया |
हम गेट के पास जाके खड़े हुए तो कुछ ही देर में दीदी भी उसी रूम की तरफ से गेट की तरफ भागी आ रही थी और बोली “सॉरी दीपू मैं लेट हो गई” शायद मुझे एक्सक्यूस देना उसने ज़रूरी नही समझा | लेकिन उसकी सिलवट पारी समीज और लाल हुए होंठों से सफ पता चल रहा था कि वो अभी अभी कौनसा खेल, खेल के आ रही थी | शायद उसने मेरी और मेरे दोस्त की बातचीत सुन ली थी | इसी लिए जल्दी से भाग के हमारे पीछे ही आ गई थी | आज मैं पहली बार अपनी दीदी को इतने ध्यान से देख रहा था | कितनी खूबसूरत थी मेरी बहन कितनी सेक्सी थी साली, किसी हेरोइन से कम नही लग रही थी |
गदराया हुआ जिस्म, उसके गोरे लाल गाल जैसे मक्खन में सिंधूर मिक्स किया हो, गोल गोल गोरी टांगें, होंठ तो इतने लाल कि लग रहा था जैसे अभी खून टपक पड़ेगा, गदराए जिस्म पे गोल गोल मुम्मे उसकी समीज में बहुत टाइट नज़र आ रहे थे | गांड के बट्स के उपर उभरी हुई सलवार कितनी सेक्सी लग रही थी | दीदी चलती तो गांड पे लंबी चोटी जैसे दीदी की गांड को थपथपा रही हो, गोल घुटने, लंबी गर्दन, आगे से लटकते थोड़े थोड़े कट किये हुए बाल दीदी की गोरी गालों पे कितने खूबसूरत लग रहे थे
आज पहली बार मैंने दीदी के जिस्म के एक एक हिस्से की अपनी आँखों से तलाशी ली थी |
दीदी की बॉडी पे अगर कोई हिस्सा उभरा नज़र आता था तो वो दीदी की समीज में टाइट चूचियां और पीछे से उभरी हुई गांड बाकी सारा जिस्म गदराया था | मेरा ध्यान दीदी के जिस्म की तरफ था और मेरा लंड दीदी की सेक्सी बॉडी देख के करेंट पकड़ रहा था लेकिन दीदी इधर उधर देख रही थी | शायद देख रही थी कि हमे घर ले जाने वाली स्कूल बस निकल चुकी थी | फिर दीदी ने मेरी तरफ देखा और मुझे उस के लाल हुए जिस्म की तरफ इतने ध्यान से देखता देख के पहले आँखों के इशारे से पूछा फिर बोली “क्या है” | मैं कुछ नही बोला | उसकी तरफ देखता रहा | चोर की दाड़ी में तिनका, जैसे उसे अपने पकड़े जाने की टेंशन होने लगी थी |
दीदी फिर बोली “दीपू, ऐसे मेरी तरफ क्या देख रहा है”
मैं “दीदी बस कहाँ है”
दीदी ने अपने लेफ्ट मुम्मे पे हाथ रखा और ठंडी सांस लेते बोली “बस शायद चली गई हम लोग लेट हो गए, चलो रिक्शा पे जाना पड़ेगा”
रिक्शा पे मैं दीदी के साथ सटके बैठ गया | आज पहली बार मुझे दीदी के करीब बैठने में कितना मज़ा आ रहा था | रिक्शा पे बैठे बैठे भी मेरा ध्यान दीदी की गोल गोल मम्मे पे था और पेंट के अंदर मेरा लंड तंबू मे बम्बू की तरह खड़ा बेकाबू हो रहा था लेकिन मैंने पेंट की पॉकेट में हाथ डाल के अपने लंड को दबा रखा था |
मेरा दिल चाह रहा था कि मैं किसी तरह दीदी की थाई पे हाथ रखूं | लेकिन डर भी रहा था फिर रास्ते में सड़क खराब होने की वजह से रिक्शा पे झटका लगा तो मैंने झट से अपने राईट हैण्ड से दीदी की लेफ्ट थाई को पकड़ लिया |
मेरा लेफ्ट हैण्ड अपनी पॉकेट में लंड को पकड़े था लेकिन अगले ही झटके में मुझे लेफ्ट हैण्ड को भी पॉकेट से बाहर निकाल के एक साइड से रिक्शा को पकड़ना पड़ा |
अब मैंने एक हाथ से दीदी की लेफ्ट थाई को पकड़ा था और दूजे हाथ से लेफ्ट साइड से रिक्शा का किनारा | मेरा लंड पेंट में तना हुआ अब साफ नज़र आ रहा था |
दीदी के कुछ ना बोलने की वजह से मेरा हौसला बड़ता गया, मेरा ध्यान दीदी की टांगों और अपने हाथ की पोज़िशन पे था और दिल धक धक कर रहा था | रिक्शा टूटी हुई सड़क पे जा रहा था और झटके लग रहे थे |
इन्ही झटकों की हेल्प से मेरी कोशिश अपने हाथ को दीदी की चूत की तरफ सरकाने की थी और काफ़ी हाथ दीदी की चूत के करीब चला भी गया | जैसे मेरा हाथ दीदी की चूत की तरफ सरकता तो सलवार मेरे हाथ के आगे अटकी होने के कारण दीदी के गोरे गोल नंगे घुटने भी दिखाई देने लगे थे |
मेरा हाथ दीदी की टांग और थाई के जॉइंट पे पहुँच चुका था लेकिन इससे आगे जाने की हिम्मत नही हो रही थी | मैंने टेडी आँख से देखा तो दीदी का ध्यान मेरे लेफ्ट साइड से तंबू की तरह उठी मेरी पेंट पे था |
मेरी ग़लती कि मैने अपनी आँखे दीदी की आँखों में डाल ली तभी दीदी चौंकी और बोली “दीपू अब रास्ता सही है आराम से बैठ” |
मेरे उसकी जांघ से हाथ उठाते ही दीदी उपर उठ के अपनी कमीज़ और सलवार सेट करने लगी थी और हम घर के करीब भी पहुँच चुके थे |
मेरा सारा मूड खराब हो चुका था | घर पहुँचते ही दीदी अपने कपड़े उठाके टाय्लेट में चली गई और फिर 15-20 मिनिट के बाद कपड़े चेंज करके ही पंजाबी सूट में बाहर निकली | दिखने में वो अब कुछ रिलैक्स लग रही थी |
रात को जैसे ही मैं दीदी के रूम के पास से निकला | मुझे लगा कि दीदी किसी से बात कर रही है | जब मैंने ध्यान लगा कर सुना तो पता चला कि दीदी फ़ोन पर उसी लड़के रोहित से बात कर रही थी | मुझे उस लड़के की बात तो नही सुन रही थी पर दीदी की बात सुन रही थी |
दीदी : हाँ हाँ तुझे कहा ना कल दे दूँगी... तुझे अपनी पेंटी |
फिर दूसरी तरफ से उस लड़के ने कुछ कहा तो दीदी ने उस से कहा यार मैने डाल ली है अपनी वही लाल पेंटी जो सुबह डाली थी और दीदी उससे काफ़ी देर तक फ़ोन पर बातें करती रही |
मेरा लंड ये बात सोचकर और भी हार्ड हो रहा था कि कल दीदी उसे अपनी यूज्ड पेंटी देगी और वो लड़का पता नही दीदी की यूज्ड पेंटी के साथ पता नही क्या करेगा |
सुबह जब दीदी मम्मी के बुलाने पर नाश्ते के लिए नीचे आई तो मैं बहाना बना कर उपर दीदी के रूम में गया और जल्दी से दीदी का पर्स खोल कर देखा उसमें दीदी की लाल पेंटी पड़ी थी |
मैने एक बार उससे निकाला और अपने होंटो से लगा कर अपने लंड पर लगाया और जल्दी से उसे दीदी के पर्स में रख दिया | मैं अब रोज़ दीदी की हर हरकत को नोट करने लगा था,पता नही क्यों?
सबका साथ सबका विकास। हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है, और इसका सम्मान हमारा कर्तव्य है
दीदी का थोड़ा सा भी नंगा जिस्म देखकर मुझे अब बहुत मज़ा आता था | मुझे बहुत कुछ समझ आने लगा था तब मैंने पूरा होश नही संभाला था | मुझे सेक्स के बारे में कुछ ख़ास नही पता था | लेकिन लंड अक्सर अपने आप खड़ा होना शुरू हो जाता था |
दोस्तों के साथ बात करते हमेशा यह जानने की कोशिश करता कि सेक्स कैसे करते हैं | लंड कहाँ डालते हैं लड़की के पीछे वाले छेद में या आगे वाले छेद में ।
उसके बाद जब मुझे मुट्ठ मारने के मज़े का पता चला तो मैं हर वक़्त सेक्स के बारे में ही सोचता रहता था और मुट्ठ मारकर खूब मज़ा लेता था,वक़्त गुज़रता गया , मैं अपनी ही बहन का दीवाना हुआ जा रहा था |
वैसे भी बाहर किसी लड़की की चूत देखना आसान नही था | इसलिए मैं घर में ही पूजा दीदी पे ट्राइ करने लगा | पहले पूजा दीदी मेरे सामने ही कपड़े चेंज कर लिया करती थी लेकिन जब से हम रिक्शा पे एक साथ आए थे तब से उसने भी थोड़ा हिचकिचाना शुरू कर दिया था |
मेरी कोशिश यह रहती थी कि किसी तरह दीदी का जिस्म देखूं या पेंटी के अंदर झांकु कि चूत कैसी होती है क्योंकि अब तक तो बस मुझे मुट्ठ मारने का पता था |
मैंने कभी रियल में चूत नही देखी थी लेकिन अब दीदी भी नोटीस करने लगी थी कि मैं उसे टच करने की कोशिश करता हूँ |
मेरे दिमाग़ में अपनी दीदी को कैसे चोदना है इसकी प्लानिंग होनी शुरू हो गई थी | साली मेरी बहन किसी और से सेक्स का खेल खेल रही थी |
मेरे दिमाग़ में यही चल रहा था कि इसको मैं ही चोदुंगा लेकिन कैसे यह उस वक़्त बहुत मुश्किल लग रहा था क्यॉंकि मेरे पास तो कोई टिप्स देने वाला भी नही था कि ऐसे करो या ऐसे ना करो फिर भी हिम्मत नही छोड़ी , रोहित हम दोनो बहन भाई का सीनियर था |
उस को मैंने कई बार दूसरी लड़कियों के साथ भी देखा था | मुझे पता था कि वो मेरी बहन की चूत मारना चाहता है बस | लेकिन मेरी बहन को पता नही उस में क्या नज़र आया जितनी सेक्सी और खूबसूरत मेरी दीदी थी मुझे सारे स्कूल में ऐसी लड़की नज़र नही आती थी |
सब लड़के उसके पीछे पीछे होते थे, लेकिन रोहित तो है भी कुछ खास नही था शायद उसमें लड़की को पटाने की कला थी | मेरी बहन इतनी सेक्सी थी कि उसने मुझे भी पागल किया हुआ था |
सेक्स के मामले मे मैं बहुत गरम था | पता नही एक दिन में कितनी बार दीदी को सोचके मुट्ठ मारता था | बस उसी को दिमाग़ में रखकर वक़्त गुज़रता जा रहा था और मुझे यही डर रहता था कि कहीं मेरी बहन बाहर से किसी से ना चुद जाए |
अगर ऐसा होगा, एक तो बदनामी, स्कूल में सब मेरा मज़ाक उड़ाते, दूसरा अगर मेरी बहन पेट से हो जाती तो आख़िर घरवालों को ही उसे सम्भालना पड़ता,तीसरा पता नही दूसरी लड़कियों के साथ सेक्स करने वाला रोहित, उसके साथ सेक्स सेफ भी था या नही | हो सकता था कोई बीमारी वगेरा भी हो |
सुनने में यह भी आता था कि वो ड्रग्स भी लेता है | लड़कियों को पटाने में भी उसका रेकॉर्ड था | मेरे दिमाग़ में जब भी दीदी का रोहित के साथ चूमा चाटी वाला सीन आता तो मुझ से कंट्रोल नही हो पाता और मुझे उसी वक़्त मुट्ठ लगानी पडती थी |
कुछ दिन बाद स्कूल में किसी लड़की ने मुझे बताया कि तुम्हारी दीदी अपने क्लास रूम में रो रही है | मैं वहां गया तो कुछ लडकियाँ उसे चुप करवा रही थी |
मैंने जाके उसका चेहरा अपने हाथों मे लेकर पूछा “क्या हुआ दीदी”,उसने मेरी तरफ देखा फिर मुझ से लिपट कर रोने लगी लेकिन कुछ बोली नही | दीदी अपना मुंह मेरी चेस्ट में छुपा रही थी |
दीदी को अपनी बाहों में संभाल कर आज मुझे अजीब सी फीलिंग हो रही थी | ‘वाह!! क्या मज़ा आ रहा था मुझे |
उसकी दोनो बड़ी बड़ी चूचियां मेरी चेस्ट के सामने पूरी तरह दब चुकी थीं | मेरा दिल धक धक कर रहा था |
मैंने ढीला सा रोने वाला मुंह बनाके बाकी लड़कियों को कहा, “आप लोग साइड पे हो जाओ प्लीज़” | पता नही कब मेरा एक हाथ दीदी की गांड के उपर उसकी सूट पे था |
फिर दूसरे लेफ्ट हैण्ड से मैं उसका चेहरा उपर करके पूछने लगा, “बताओ तो सही दीदी हुआ क्या है” | उसकी आँखें झुकी हुई थी | वो मेरी आँखों में आँखें नही डाल रही थी |
कितनी खूबसूरत थी मेरी बहन | उसका गोरा रंग लाल हो चुका था और एक एक आँसू उसकी गालों पे बहुत मज़े से चल रहा था | इस वक़्त मैं अपनी बहन की पूरी बॉडी और गरम साँसों को बिल्कुल करीब से महसूस कर रहा था |
उसकी चुचियां उसकी गांड़, उसका पेट, उसकी कमर, उसके होंठ तो मेरे होंठों के बिल्कुल करीब थे | दिल कर रहा था अभी चूस लूँ, दीदी के रस भरे होंठो को,लेकिन मज़बूर था | मैं इस सेक्सी पूजा दीदी का छोटा भाई था और सबके सामने कुछ भी नही कर सकता था |
शुक्र है मैंने व-शेप अंडरवेयर पहन रखा था | उसमे मेरा लंड पूरा टाइट हुआ खड़ा था | अपनी बहन का दहकता बदन फील करके शायद मेरा लंड भी मुझ से कह रहा था कि बहन होगी तेरी, मेरा तो ये चोदने का समान है |
वो रोई जा रही थी और मैं अपना मज़ा ले रहा था | कोई कुछ बता भी नही रहा था कि क्या हुआ है | फिर मैंने एक लड़की से पूछा कि आपको पता क्या हुआ | वो बोली पता नही रोहित और ऋतु का कोई चक्कर है |
इन दोनो में कोई झगड़ा हुआ है और प्रिन्सिपल सर ने दोनो को वॉर्निंग दी है और कल अपने पेरेंट्स या गार्डियंस को साथ लाने को कहा है |
मैं समझ गया कि क्या झगड़ा हुआ होगा,चलो मेरे लिए अच्छा ही था | अब मुझे अपना रास्ता साफ दिखाई देने लगा था | मैं दीदी को चुप तो करवा ही रहा था लेकिन मेरा दिमाग़ बस अपनी सेक्सी बहन को चोदने की प्लानिंग मे लगा था |
दीदी के जिस्म ने अभी जो मेरे अंदर आग लगा दी थी उसको शांत करने का मौका नही मिल रहा था | घर जाते ही मैंने बाथरूम से दीदी की पेंटी उठाई और उसकी स्मेल लेने लगा |
धुली हुई पेंटी से भी शायद उसकी चूत की थोड़ी बहुत स्मेल आ रही थी, मेरे अंदर का पानी और भी उबाले मारने लगा, मैंने पहले इमेजिन किया कि पेंटी का कौनसा हिस्सा दीदी की मस्त चिकनी चूत को छूता होगा फिर उस हिस्से पे अपनी जीभ फिराई और फिर उसी हिस्से को अपने लंड पे रखके मुट्ठ मारना शुरू कर दिया |
आँखें बंद हो गई | दिमाग़ में वही तस्वीर थी | दीदी का मुझ से लिपटना और दीदी की तनी हुई चुचियों की चुभन मुझे अभी भी फील हो रही थी | उसका देहकता बदन उसके लाल होंठ सोचते सोचते मेरी मुट्ठ मारने की स्पीड तेज होती जा रही थी |
अब मेरे दिमाग़ में खाली उसके लाल होंठ फ़्लैश कर गये और एक ख्याल आया कि काश मैं दीदी के होंठों पे अपने लंड का पानी निकालूँ | फिर ऐसा लगा कि जैसे पूजा दीदी के पिंक होंठ मेरे लंड के बिल्कुल सामने मेरे लंड का पानी निकलने की इंतज़ार कर रहे हों |
उसी वक़्त मेरे अंदर से गरम मलाई निकली और मैंने अपने लंड को दीदी की पेंटी के अंदर ही मसल दिया | पेंटी के चूत वाले हिस्से से लेकर उपर तक सारी पेंटी मेरे लंड की मलाई से भर गई ।
मैंने अपने लंड को पेंटी के सूखे हिसे से पोंछके धीरे से पेंटी इस तरीके से वापिस रख दी कि उसमें पड़ा मेरा कम नीचे ना गिरे |
अब ऐसा करना यानी दीदी की पेंटी पर अपने लंड का पानी निकालना मेरा रोज़ का काम हो गया था | लेकिन पता नही क्यों दीदी कोई रेस्पॉन्स नही दे रही थी |
आख़िर वो अपनी पेंटी तो चेक करती ही होगी फिर भी कोई रेस्पॉन्स नही दे रही थी | मैं उसकी तरफ से बस एक प्लस पॉइंट का इंतज़ार कर रहा था |
अगर आपको यह कहानी पसंद आये तो कमेंट जरुर दीजिएगा ...........











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